अपनी इकलौती संतान की परवरिश के लिए ना लें टेंशन...बस ये टिप्स आज़माएं

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पहले के ज़माने में लोग एक से ज्यादा बच्चे कर लेते थे लेकिन अब समय के साथ साथ लोग जागरुक हुए हैं और आज के समय में कुछ लोगों को एक ही बच्चा चाहिए तो वहीं कुछ लोग दो बच्चों की चाहत रखते हैं।

जैसे ही किसी की शादी होती है तो वो कपल अपने बनने वाले प्यारे से परिवार के सपने सजाने लगता है। शादी के बाद वो एक से दो होते हैं और हर किसी का सपना होता है दो से तीन होने का, यानि अपनी संतान का।

कुछ लोग शादी के तुरंत बाद ही बेबी की प्लानिंग करना शुरू कर देते हैं तो कुछ लोग पहले अपनी मैरिड लाइफ का कुछ समय तक लुत्फ उठाते हैं फिर बाद में बेबी प्लानिंग करते हैं। लेकिन हर कोई चाहता है कि उनके घर में  बच्चे की किलकारियां गूंजे।

पहले के ज़माने में लोग एक से ज्यादा बच्चे कर लेते थे लेकिन अब समय के साथ साथ लोग जागरुक हुए हैं और आज के समय में कुछ लोगों को एक ही बच्चा चाहिए तो वहीं कुछ लोग दो बच्चों की चाहत रखते हैं।

इकलौती संतान की परवरिश

लेकिन कुछ भी कहो बच्चे जितने कम हों उनकी परवरिश उतनी ही अच्छी तरह से की जा सकती है। लेकिन जो लोग इकलौते बच्चे के माता-पिता हैं उन्हें अपने बच्चे की परवरिश करते समय काफी ध्यान रखना चाहिए।

चूंकि हर माता-पिता अपने बच्चे को लाड़ प्यार पालते हैं लेकिन इस लाड़ प्यार में उन्हें इस बात पर ध्यान देना होगा कि कहीं उनका लाड़ उन्हें बिगाड़ तो नहीं देगा।

src=https://hindi admin.theindusparent.com/wp content/uploads/sites/10/2018/01/happy family.jpg अपनी इकलौती संतान की परवरिश के लिए ना लें टेंशन...बस ये टिप्स आज़माएं

हर कोई चाहता है कि उसके इस दुनिया से जाने के बाद कोई ऐसा भी हो, जो उसका और उसके वंश का नाम चलाएं और उसे याद रखे।

पुराने ज़माने में लोग कई-कई बच्‍चों को जन्‍म देते थे, लेकिन आज के आधुनिक युग में लोग एक या दो से ज्‍यादा बच्‍चों को जन्‍म देना उचित नहीं समझते है। समाज में लोगों की समझ का स्‍तर बढ़ा है, अब अच्‍छे और समझदार परिवारों में सिर्फ एक ही बच्‍चे का जन्‍म सही माना जाता है।

आज हम आपको इस लेख में में इकलौती संतान के माता-पिता के लिए कुछ टिप्‍स बताएं जा रहे हैं..पढ़िए...

उम्मीदें ना थोपें

चूंकि आपकी इकलौती संतान है तो आपको उससे ढेर सारी उम्मीदें भी होंगी। लेकिन आप कोशिश करें कि उसपर अपनी उम्मीदों का बोझ ना डालें। इससे बच्चे का स्ट्रेस बढ़ने लगता है।

कुछ देर अकेला भी छोड़ें

कुछ लोग होते हैं जो अपने इकलौते बच्चे के साथ हमेशा रहते हैं जिस कारण वो अपनी उम्र के बच्चों के साथ वाले बच्चों के साथ समय नहीं बिता पाते और वो अकेलापन महसूस करते हैं। इस कारण आपका बच्चा चिढ़चिढ़ा भी हो सकता है।

आत्मनिर्भर बनाएं

इकलौता बच्चा होने का मतलब ये नहीं है कि आप उसका एक एक काम करें। आप अपने बच्चे को सेल्फ डिपेन्डेंट बनाएं। ताकि वो आपके ना होने पर भी अपने काम कर सके।

हर ज़िद ना मानें

अगर आपका इकलौता बच्चा है तो इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि आप उसकी सारी मांग पूरी करें। अगर आपको लगे कि बच्चे की डिमांड उसे बिगाड़ सकती है उसकी मांग पूरी ना करें।

हद से ज्यादा ध्यान रखना

ध्यान रखना अच्छी बात है लेकिन हद से ज्यादा ध्यान रखना भी ठीक नहीं। आपका बच्चा कहीं जा रहा है तो पांच मिनट लेट होने पर भी आप टेंशन लेना शुरू ना कर दें। अगर वो लेट होता है तो उस पर चिल्लाएं नहीं बल्कि उसे समझाएं।

यह कुछ ऐसे टिप्स हैं जो आपको अपनी इकलौती संतान की देखभाल और परवरिश के दौरान ध्यान में रखने चाहिए।