अदिरा को “Goodbye” करने के लिए हैं रानी मुखर्जी तैयार..लिया इतना बड़ा फैसला!

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किसी भी कामकाजी मां की तरह रानी मुखर्जी भी चाहती हैं कि उनकी बेटी अदिरा जिंदगी के महत्वपूर्ण पाठ को सीखें और अगर इसके लिए उन्हें अदिरा से दूर भी जाना पड़े तो वो इसके लिए तैयार हैं।

रानी मुखर्जी अपनी दूसरी प्रोफेशनल पारी को शुरू करने के लिए तैयार हैं। लगभग दो सालों तक फिल्मों से दूर रहने के बाद वो जल्द ही अपनी फिल्म हिचकी से कमबैक करने जा रही हैं।

काम पर वापस लौटने का अर्थ है अदिरा को छोड़ना और ऐसा लगता है कि काम की वजह से अगर रानी मुखर्जी को अपनी बेटी को गुडबाय भी कहना पड़े तो वो इसके लिए तैयार हैं।  

जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा।

अब काम पर लौटने का समय आ गया है

अदिरा के जन्म के दो सालों के बाद वापस काम पर लौटने के फैसले के बारे में बात करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा कि किसी भी कामकाजी पैरेंट्स की तरह उन्हें भी अपनी बेटी को छोड़कर काम पर लौटना होगा और अदिरा को भी अपनी मम्मी के बिना रहना सीखना होगा।

नई मॉम रानी मुखर्जी ने कहा कि मुझे फुल टाइम मां रहना पसंद है और इसे मैं दो सालों से इंज्वॉय कर रही हूं। लेकिन अब मुझे लगता है कि वापस काम पर लौटने का समय आ गया है।

आपका बच्चा आपको आत्मनिर्भर मां के रूप में जाने

उन्होंने साथ ही कारण भी बताया कि वो वापस काम इसलिए शुरू करना चाहती हैं ताकि उनकी बेटी समझे कि उनकी मां होने के साथ-साथ वो एक आत्मनिर्भर कामकाजी औरत भी हैं।

कुछ कुछ होता है जैसी सफल फिल्में दे चुकी रानी मुखर्जी को कुछ दिनों पहलो उनके काम के लिए मॉरिशस सरकार की तरफ से सम्मानित किया गया। रानी मुखर्जी ने कहा कि आपके बच्चा आपको सिर्फ मां नहीं बल्कि एक इंडिपेन्डेंट औरत के रूप में जाने जो बाहर जाती है और काम करती है और इस वजह से वो आपकी इज्जत करे।

बतौर मां हर दिन सीख रही हूं

हालांकि, रानी मुखर्जी ने ये जरूर कहा है कि वो वापस अपने प्रोफेशन में लौटना चाहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखना चाहती हैं साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि अदिरा उनकी असल शिक्षक बन चुकी हैं।

नई डॉटिंग मॉम ने शेयर किया कि सभी कहते हैं कि आप बच्चे को जन्म देते हैं और आपका बच्चा आपको मां के रूप में जन्म देता है।मैं हर दिन बतौर मां कुछ ना कुछ सीख रही हूं और मुझे यकीन है कि मेरी बेटी मातृत्व के बारे में मुझे और भी बहुत कुछ सिखाएगी।

रानी मुखर्जी अपनी बेटी के जन्म के बाद ऑनस्क्रीन नजर आने के लिए कमर कस चुकी हैं। इसके साथ ही वो बेबी के जन्म के बाद काम करने की लिस्ट में कई भारतीय महिलाओं के साथ शामिल हो चुकी हैं। लेकिन हां, इसमें शर्म जैसी कोई बात नहीं है।

जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि एक कामकाजी मां बच्चे के लिए सबसे बड़ी रोल मॉडल होती है। हम आपको बता रहे हैं कि वर्किंग मॉम होने के कारण बच्चों पर क्या सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कामकाजी मां होने के तीन सकारात्मक प्रभाव -

  • सकारात्मक रोल मॉडल: कामकाजी माएं अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल होती हैं और उन्हें टाइम मैनेजमेंट से लेकर मल्टी टास्किंग भी बनाती हैं। इसके साथ ही काम और घर में कैसे सामंजस्य बनाया जाए इसका महत्व भी उन्हें बखूबी पता होता है। कामकाजी माएं या लड़कियां करियर का महत्व समझती हैं और लड़कों को पता होता है कि वो घर में कितनी अह्म भूमिका निभाती हैं।
  • बच्चों को आत्मनिर्भर बनाती हैं: जब बच्चे देखते हैं कि मां घर और ऑफिस दोनों ही संभालती हैं और समस्याओं का निपटारा करती हैं तो उन्हें पता होता है कि आत्मनिर्भर होना कितना जरूरी है।ऐसे बच्चे बड़े होकर किसी दूसरे पर निर्भर नहीं होते हैं और इसका श्रेय उनकी मां को जाता है।
  • एकेडमिक में भी माहिर: स्टडी की माने तो कामकाजी माएं बच्चों के एकेडमिक पर अधिक ध्यान देती हैं क्योंकि वो अपने समय का प्रबंधन भी अच्छे से करती हैं। कामकाजी माएं अच्छी शिक्षा का महत्व समझती हैं और बच्चों को भी एकेडिमिक पर ध्यान देने के लिए उत्साहित करती हैं।