अगर प्रेग्नेंसी में आता है बार बार रोना...तो जान लें इसके बुरे प्रभाव

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चूंकि गर्भावस्था में शरीर में कई तरह के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं तो ऐसे में उनमें चिड़चिड़ापन एक सामान्य बात है। बहुत सी ऐसी महिलाएं होती हैं जो प्रेग्नेंसी के दौरान काफी भावुक हो जाती हैं और उन्हें रोना आ जाता है।

एक गर्भवती महिला के लिए उसके और उसके अंदर पल रही नन्ही सी जान के लिए अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे पहले यही सलाह दी जाती है कि एक तो गर्भवती का खानपान अच्छा हो और दूसरा वो हमेशा खुश रहे। यह परिवार और खुद गर्भवती महिला की जिम्मेदारी होती है कि वो अच्छा खानपान खाए और हमेशा नकाराम्क बातों को दिमाग में ना लाकर खुश रहने की कोशिश करें।

लेकिन वो हमेशा ही खुश रहे ऐसा ज़रूरी नहीं। इसका कारण है प्रेग्नेंसी में होने वाले मूड स्विंग। चूंकि गर्भावस्था में शरीर में कई तरह के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं तो ऐसे में उनमें चिड़चिड़ापन एक सामान्य बात है। बहुत सी ऐसी महिलाएं होती हैं जो प्रेग्नेंसी के दौरान काफी भावुक हो जाती हैं और उन्हें रोना जाता है।

ऐसा अक्सर ही होता है कि गर्भवती महिला किसी ना किसी बात पर कभी भी रो पड़ती हैं। जैसा कि आपको पता ही होगा कि प्रेग्नेंसी में हर कोई आपको खुश रहने की सलाह देता है ताकि आपका बेबी स्वस्थ्य रहे और एक स्वस्थ्य रूप से जन्म ले सकें।

लेकिन क्या आपको पता है कि प्रेग्नेंसी में रोने से आपके बच्चे की सेहत पर काफी असर पड़ता है। गर्भावस्था में रोने से जितना बुरा असर आप पर पड़ता है उतना ही बुरा असर आपके बेबी पर भी पड़ता है।

आपको बताते चलें कि जो महिला प्रेगनेंसी में छोटी छोटी बातों पर रोने लगती हैं या ज़रूरत से ज्यादा तनाव में रहने लगती हैं तो उनमें कोलिकी बेबी को जन्म देने की संभावना और भी ज्यादा बढ़ जाती है।

जिन्हें नहीं पता उनकी जानकारी के लिए बता दें कि कोलिकी बच्चे वो होते हैं जो बहुत ज्यादा रोते हैं। हालांकि, यह समस्या अधिक तनाव लेने से होती है, और ऐसे में आपके बॉडी से एक हार्मोन रिलीज करता है।

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इसलिए आप जितना हो सके खुश रहने की कोशिश करें। हालांकि ऐसे में तनाव होना काफी आम बात है लेकिन आप कोशिश करें कि उन सभी बातों से ध्यान हटाकर सकारात्मक बातों में लगाएं जिससे आपको तनाव से राहत मिले।

अगर आप ज़रूरत से ज्यादा तनाव लेंगी तो आपके बच्चे की सेहत पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए आप हमेशा कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा खुश रहें। अगर आपको बार बार तनाव हो और रोना आए तो इसे गंभीरता से लेना शुरू कर दें।

ऐसा होने पर आप उन चीज़ों में मन लगाएं जिनसे आपको खुशी मिलती हो।

तो अगर आपको भी प्रेग्नेन्सी के दौरान ज़्यादा रोना आता है और आप अधिक तनाव में जाने लगती हैं तो इस बात को गंभीरता से लेना शुरू करें। आप इन सभी भावों से बचने के लिए आप अपना ध्यान उन चीज़ों में लगाइये जिनसे आपको ख़ुशी मिलती है।

यदि आप घर में अकेली हों और आपको इधर उधर की बातें नकारात्मकता की ओर धकेल रही हों तो फौरन इस पर विचार करो कि ऐसा क्यों हो रहा है। ऐसे नकारात्मक ख्यालों से बचने के लिए आप अपने दोस्तों से फोन पर बात कर सकती हैं या फिर अपने परिवार वालों से बात करके अपना दिल बहला सकती हैं।

अपनों से बात कर के आपको काफी अच्छा लगेगा। इसके अलावा आप बाहर कोई फिल्म देखने जा सकती हैं या अपनी ही पसंदीदा फिल्म आप घर में देख सकती हैं। इससे आपका दिल बहला रहेगा।

यही नहीं, आप बाहर पार्क में घूमने जा सकती हैं जिससे एक ओर आपका मन बहला रहेगा तो वहीं दूसरी ओर ताज़ी हवा आपको और आपके शिशु को तरोताज़ा रखेगी।